At Marpha ,Mustang ,2010.

At Marpha ,Mustang ,2010.
Hum-Dono

Wednesday, August 18, 2010

वाह ! बाउ

वाह ! बाऊ, तों उठि बैसलह,
तें की ? जं बेर-बेर खसलह !
पीबह दूध , लगाबह जोर ,
डेग उठाबह थोरबो-थोर .

...आंखि- पाँखि वायुक संयोग ,
सब किछु सहज, करह उपभोग .
अपने ऊहि, अपने विश्वास ,
सोन- चिरई उरैछ आकाश !

Monday, August 2, 2010

नेनपनक स्मृति

नेनपन केर सब सँ पुरान स्मृति ? कहब मोसकिल अछि . मुदा जं चिर अतीत में भसिआइ, तं सब सँ पुरान आ भयावन स्मृति कमलाक बाढ़िक हयत. चारू दिस पसरल पानि, त्राहि-त्राहि करैत मनुक्ख , रंग-बिरंगक कीरा- मकोरा-साँप-बीछ आ असक्क माल-जाल. ने जयबाक बाट, ने खायाबक अन्न , ने जरयबा ले जारनि, आ ने रहबाले निचू चार . मुदा संतोष एतबे जे गाम में सबहक हाल मोटा -मोटी एके रंग रहै. तथापि सब के तं अपने जानक चिंता , अपने धिया-पुताक बेगरता . दिन भयावह लागै, आ राति पहाड़. ककरो टाटक घर भसि जाई, त ककरो भीत खसि परै. ककरो भीतक तर माल-जाल मरि जाई आ पतिया लगै, त केओ अपनहि अपंग भ जाय.
तै पर सँ लागल जजात दहा जाई , पाकल आम लोक तोरि नहिं पाबय . रेलक पटरी बही जाई , बान्ह भासि जाई . सब कतौक बाट बन्न भ जाई . लोक परएबो करत त कतय ? येह थिक हमर सब सँ पुरान स्मृति जे एखन धरि मानस पटल पर शिला लेख जकां परल अछि .
सब सँ सुखद स्मृति ? पोखरि में भरि मोन चुभकब , गाछी में भट- भट खसैत पाकल आम बीछब - चोभा मारब . लातम,जामुक गाछ पर चरहब , बारीक गुलाबखाश आमक डारि पर मचकी झूलब . छैठ-चौरचनक पकबान खायब , पंचमी-आर्द्राक खीर सपेट्ब, आ सरिसब बाला माछक झोर सुरकब.
ठनका सँ डर होइत छल आ ताश- पचीसी सँ दूर रहैत छलहुँ. अनका पढ़एब नीक लागैत छल मुदा लाल-बहिन माय के शिकायत करथिन तै सँ साकांछ रहैत छलहुँ.
दरबज्जा पर गाय छली ,मुदा मरखाही. दूध नहिए, तरद्दुद ढेर. दादा बेसी काल बाहर रहैत छलाह . हुनका सँ डेरैत बहुत रही , तें नीके लागे.
अन्हरिया पक्ष में चोरहोक बड्ड हल्ला होई , राति में डरे सकदम्म भ कय सूती आ भोरे निःश्वास लेत उठी.
पढ़ैक जिज्ञासा अत्यंत छल मुदा गाम में शिक्षित लोकक संख्या बड्ड कम रहै; बाल-बर्गक गणित पढ़ओनिहार धरि केओ नहि. जीबू आ शिबू भाई सबसँ लग में आ सुलभ शिक्षक छलाह. स्कूल में मास्टर सेहो बुझाबथि. स्कूल जयबा काल गाछी सब में सब के भूत-प्रेतक डर होई.गामक चारू कात त गाछी- कलम छलैहे. ताहि पर सँ लकर-सुन्हा बाबाजीक भय .संगी-साथी में छर्पा ( स्व. नारायण चौधरी ), नथुनी , राजिन्द्र ( ठाकुर) , दुखी( मंडल) , ठकनी ( प्रभा कुमारी ), मिथिलेश कुमारी , राम दाई आ, अपन लाल-बहिन ( दिवंगता शीला देवी) छलीह . खेलायाबाक खेलौना में कनैलक बीया , काचक गोली, आ गेंद. दौर-धूप, कबड्डी- कुश्ती सेहो होइक, मुदा हम ताहि सब सँ दूर रही , माय कहथि ई कमजोर छथि, पेट कहियो ठीक नहीं रहै छनि, डांड-डोरि हरदम डांड सँ खसैत रहैत छनि. कोना नहिं होइत , संतुलित आहार शब्द स्कूल में सुनने नहिं रहिए. स्वास्थ्य- विज्ञानक ककरो ज्ञान नहिं रहै . टीकाक नाम पर चेचक केर टीका होई जाहिमें एकेटा रोटरी- लांसेट स हेल्थ-वर्कर भरि स्कूलक नेना के पाची देथिन. हैजाक टीका के ले केओ आबथि त चांगला छओरा सब स्कूल सँ भागिजाय , की त सुई सँ ज्वर भ जायत .
बहुत दिन भ गेलै, बहुत लोक मरि गेल , बहुत गप्प बिसरि गेल .मुदा होइए ,एक बेर सबटा ओहिना देखतिअइ .

Tuesday, July 27, 2010

की लिखू ?

बहुत दिन सँ किछु - किछु लिखबाक प्रबृत्ति अछि मुदा लिखै छी तं तकरा पढ़ैत के अछि ? ई प्रश्न सदति मन में अबैत अछि.गीत गबैत छी तं सुनैत के अछि, ई प्रश्न गुन-गुनेबा कल नहीं अबैत अछि मुदा लिखबा काल लिखबाक औचित्य सोंझा आबि क ठाढ़ अबश्य भ जाई अछि.तखन करी की ? करू जे किछु , मुदा लिखब त बन्ने अछि.

Saturday, October 17, 2009

Play it safe

Deepavali symbolizes triumph of light over darkness, truth over untruth , good over evil.But year after year fire accidents during deepavali leads to tragic loss of life numerous lives.
Is it inevitable ? Can't we spare a little thought? Can't we play it a little safe? Can't we inculcate responsibility of behaviour, and save lives? If the answer is yes, we sure can prevent repeatition of such avoidable tragedies.
Let us all ponder.
Let us talk to manufactures of fire crackers.Let us educate the adults. Let us also educate our children, in schools and at homes, to adopt safe practices, always and everywhere, in whatever they do.Side by side, let us also hold the law enforcing agencies responsible for any dereliction of duty, and award them swift and exemplery punishments.