वाह ! बाऊ, तों उठि बैसलह,
तें की ? जं बेर-बेर खसलह !
पीबह दूध , लगाबह जोर ,
डेग उठाबह थोरबो-थोर .
...आंखि- पाँखि वायुक संयोग ,
सब किछु सहज, करह उपभोग .
अपने ऊहि, अपने विश्वास ,
सोन- चिरई उरैछ आकाश !
तें की ? जं बेर-बेर खसलह !
पीबह दूध , लगाबह जोर ,
डेग उठाबह थोरबो-थोर .
...आंखि- पाँखि वायुक संयोग ,
सब किछु सहज, करह उपभोग .
अपने ऊहि, अपने विश्वास ,
सोन- चिरई उरैछ आकाश !
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